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Friday, 1 September 2017

क्रिकेट में बांग्लादेश और वेस्टइंडीज की बड़ी टीमों पर जीत से आखिर कांग्रेस क्यों है खुश!

क्रिकेट में बांग्लादेश और वेस्टइंडीज की बड़ी टीमों पर जीत से आखिर कांग्रेस क्यों है खुश!

बात कांग्रेस के वर्तमान राजनीतिक हालात की करें, तो जबसे पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने बीजेपी की कमान संभाली है तब से कांग्रेस की स्थिति काफी खराब है.
क्रिकेट में बांग्लादेश और वेस्टइंडीज की बड़ी टीमों पर जीत से आखिर कांग्रेस क्यों है खुश!
हाल ही में क्रिकेट जगत में दो बड़े उलटफेर हुए हैं. जहां एक ओर बांग्लादेश ने टेस्ट क्रिकेट की सबसे मजबूत टीम मानी जाने वाली ऑस्ट्रेलिया को धूल चटाकर सनसनी फैला दी, वहीं इस समय बदलाव के दौर से गुजर रही बेहद कमजोर वेस्टइंडीज टीम ने इंग्लैंड को उसी की धरती पर पटखनी दे डाली. जाहिर है इस जीत से दोनों ही कमजोर टीमों के फैन्स काफी खुश और रोमांचित हैं, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इससे भारत की बड़ी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस क्यों खुश नजर आ रही है. इसका खुलासा उस समय हुआ जब कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व वित्तमंत्री चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर इसका जिक्र कर दिया. हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर इसके पीछे वजह क्या है...
सबसे पहले अगर बात कांग्रेस के वर्तमान राजनीतिक हालात की करें, तो जबसे पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने बीजेपी की कमान संभाली है तब से कांग्रेस का बुरा हाल हो गया है. इन दोनों के नेतृत्व में बीजेपी ने कांग्रेस को कई मोर्चों पर पराजित किया है और कई दिग्गज कांग्रेसी नेताओं ने भी पार्टी का साथ छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया है. देखा जाए तो इस समय कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल भी गिरा हुआ नजर आ रहा है. इसके लिए उनको मनौवैज्ञानिक सपोर्ट की जरूरत नजर आ रही है.
संभवतः इसी को ध्यान में रखते हुए यूपीए सरकार में वित्‍त मंत्री रहे पी चिदंबरम ने ट्वीट करते हुए बांग्लादेश और वेस्टइंडीज जैसी कमजोर टीमों की जीत पर खुशी का इजहार किया है और पार्टी को इशारों में खास संदेश भी दिया है. चिदंबरम के संदेश से लग रहा है कि वह कांग्रेस कार्यकर्ताओं को इससे सबक लेने को कह रहे हैं.
चिदंबरम ने लिखा है, 'बांग्‍लादेश ने ऑस्‍ट्रेलिया को हराया, वेस्‍टइंडीज ने इंग्‍लैंड को. सीख- कुछ भी असंभव नहीं'

कांग्रेस पहले भी कर चुकी है वापसी
चिदंबरम के संदेश में कांग्रेस के लिए एक ही मंत्र है कि कुछ भी असंभव नहीं होता. मतलब अगर पूराप्रयास किया जाए तो बड़े से बड़े दिग्गज को भी हराया जा सकता है. चिदंबरम की इस बात में दम तो है. 1967 को ही लीजिए उस समय कांग्रेस 9 राज्यों में सत्ता से बाहर हो गई थी, फिर पार्टी ने वापसी की और इंदिरा गांधी को 1971 में भारी बहुमत मिला था.
एमरजेंसी के समय भी माना जा रहा था कि कांग्रेस की वापसी मुश्किल होगी, लेकिन 1977 में हार के तीन साल बाद पार्टी ने वापसी कर ली थी. 90 का दशक भी कांग्रेस के लिए अच्‍छा नहीं रहा, लेकिन 2004 में कांग्रेस ने फिर सत्ता संभाली और 10 साल देश पर शासन किया. मतलब कांग्रेस के लिए चिदंबरम की यह नसीहत काम आ सकती है.

रोहिंग्या मुसलमानों को वापस भेजने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा SC

रोहिंग्या मुसलमानों को वापस भेजने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा SC

दो रोहिंग्या आव्रजकों द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि वे म्यांमार में मुकदमे का सामना कर रहे हैं और उन्हें वापस भेजना विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संधियों का उल्लंघन है.

रोहिंग्या मुसलमानों को वापस भेजने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा SC
नई दिल्ली:  उच्चतम न्यायालय शुक्रवार को उस याचिका पर सोमवार को सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया जिसमें अवैध रोहिंग्या मुसलमान आव्रजकों को वापस म्यांमार भेजने के फैसले को चुनौती दी गई है. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति एएम खानविलकर तथा न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने अधिवक्ता प्रशांत भूषण के इस अभिवेदन पर विचार किया कि रोहिंग्याओं को उनके गृह देश वापस भेजने के सरकार के फैसले के मद्देनजर याचिका पर तत्काल सुनवाई करना आवश्यक है. दो रोहिंग्या आव्रजकों द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि वे म्यांमार में मुकदमे का सामना कर रहे हैं और उन्हें वापस भेजना विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संधियों का उल्लंघन है. 
म्यांमार के राखिन प्रांत से भारत आए हैं रोहिंग्या मुसलमान
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 18 अगस्त को रोहिंग्या आव्रजकों को वापस भेजने की योजना पर केंद्र को नोटिस जारी किया था. ये लोग देश के विभिन्न हिस्सों में रह रहे हैं. म्यांमार के राखिन प्रांत में हिंसा के बाद ये रोहिंग्या मुसलमान भारत भाग आए थे. वे जम्मू, हैदराबाद, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर और राजस्थान में रह रहे हैं.
40 हजार रोहिंग्या अवैध रूप से रह रहे हैं
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजीजू ने उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर नौ अगस्त को संसद में कहा था कि यूएनएचसीआर में पंजीकृत 14 हजार से अधिक रोहिंग्या भारत में रह रहे हैं. उन्होंने कहा था कि लगभग 40 हजार रोहिंग्या भारत में अवैध रूप से रह रहे हैं.
केंद्र सरकार ने जताई थी चिंता
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को भेजे पत्र में कहा था कि पिछले कुछ दशकों में आतंकवाद में बढ़ोतरी लगभग सभी देशों के लिए एक गंभीर चिंता बन गयी है क्योंकि अवैध आव्रजकों को आतंकी संगठनों द्वारा भर्ती किए जाने की संभावना है.
केंद्र ने राज्यों से टास्क फोर्स का गठन करने को कहा था
केंद्र ने राज्य सरकारों को निर्देश दिया था कि वे अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान करने और उन्हें वापस भेजने के लिए जिला स्तर पर टास्क फोर्स का गठन करें. 

इस्‍तीफे के सवाल पर बोलीं उमा भारती, 'ये सवाल सुना ही नहीं, न सुनूंगी, न जवाब दूंगी'

इस्‍तीफे के सवाल पर बोलीं उमा भारती, 'ये सवाल सुना ही नहीं, न सुनूंगी, न जवाब दूंगी'

कुछ मीडिया रिपोटर्स में केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती के इस्‍तीफे की बात कही जा रही है. हालांकि इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.
इस्‍तीफे के सवाल पर बोलीं उमा भारती, 'ये सवाल सुना ही नहीं, न सुनूंगी, न जवाब दूंगी'
नई दिल्‍ली : केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चा के बीच कई मंत्रियों के इस्‍तीफा देने की खबर है. इस्‍तीफा देने वाले मंत्रियों में राजीव प्रताप रूडी, संजीव बालियान और फग्गन सिंह कुलस्ते का नाम सामने आ चुका है. इस्तीफा देने के बाद रूडी और संजीव बालियान ने कहा कि उन्होंने बीजेपी नेतृत्व के आदेश पर इस्तीफा दिया है. संगठन की तरफ से उन्‍हें जो भी जिम्‍मेदारी दी जाएगी, उसे वह बेहतर तरीके से निभाएंगे. सूत्रों के अनुसार केंद्रीय मंत्रिमंडल से 8 से 9 मंत्रियों के इस्‍तीफे शनिवार को हो सकते हैं.
कुछ मीडिया रिपोटर्स में केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती के इस्‍तीफे की बात कही जा रही है. हालांकि इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. मीडिया ने जब उनसे इस्‍तीफे पर सवाल किया तो उन्‍होंने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया. केंद्रीय मंत्री ने अपने ट्विटर हैंडल पर झांसी के लक्ष्मी ताल का निरीक्षण करते हुए एक पोस्‍ट की है.
उन्‍होंने आगे लिखा 'कल से चल रही मेरे इस्तीफे के खबरों पर मीडिया ने प्रतिक्रिया पूछी. इसपे मैंने कहा कि मैंने ये सवाल सुना ही नहीं, न सूनूंगी, न जवाब दूंगी. उन्‍होंने यह भी लिखा कि इस बारे में या तो राष्ट्रीय अध्यक्ष जी जिसको नामित करे, वहीं बोल सकते है. मेरा इसपर बोलने का अधिकार नहीं है.
आपको बता दें कि मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल के आसार जताए जा रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक मंत्रिमंडल से 8 से 9 मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है. जिन मंत्रियों को मंत्रिमंडल से हटाया जाएगा, उन्‍हें संगठन में बड़ी जिम्‍मेदारी दी जा सकती है. मंत्रिमंडल में पूरा फेरबदल 'P&N' के आधार पर किया जाएगा. मंत्रियों की कामकाज के आधार पर एक एक्‍सेल शीट तैयार की गई है.
शीट में जिन मंत्रियों का काम संतोषजनक है, उनके नाम के आगे पी यानी पॉजिटिव लिखा गया है. वहीं अन्‍य के आगे एन यानी निगेटिव लिखा गया है. इस लिस्‍ट में बीजेपी के साथ ही सहयोगी दलों के मंत्रियों के भी नाम शामिल हैं. लिस्‍ट में जिनके नाम के आगे एन लिखा है, उनकी मंत्रिमंडल से छुट्टी तय मानी जा रही है. पूरी फेरबल इस शीट के आधार पर ही होगा.
हालांकि किन-किन मंत्रियों का इस्‍तीफा लिया जाएगा, इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. जिन नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है, उनमें अश्विनी चौबे, हेमंत बिस्वा, प्रह्लाद जोशी, भूपेन्द्र यादव, विनय सहस्त्रबुद्धे, हरीश द्विवेदी, सुरेश आंगड़ी और सतपाल सिंह का नाम प्रमुख है.

Thursday, 31 August 2017

बिहार कांग्रेस के कई विधायकों के जेडीयू का दामन थामने की आशंका, सोनिया ने की बैठक

बिहार कांग्रेस के कई विधायकों के जेडीयू का दामन थामने की आशंका, सोनिया ने की बैठक

बिहार के कांग्रेस के 27 विधायकों में से कम से कम 18 नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड में जा सकते हैं

बिहार कांग्रेस के कई विधायकों के जेडीयू का दामन थामने की आशंका, सोनिया ने की बैठक
पटना: बिहार कांग्रेस के विधायक दल में संभावित विभाजन को लेकर पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और बिहार कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की. इस बैठक में गुलाम नबी आजाद, अहमद पटेल, सीपी जोशी के अलावा बिहार कांग्रेस के नेता सदानंद सिंह और अशोक चौधरी मौजूद थे.

बिहार कांग्रेस के विधायकों में से कुछ के जेडीयू के साथ जाने की आशंका बनी हुई है जिसको लेकर पार्टी अध्यक्ष चिंतित हैं. इसी को लेकर सोनिया गांधी ने आज बिहार कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं सदानंद सिंह और अशोक चौधरी को दिल्ली तलब किया था. सिंह जहां विधायक दल के नेता हैं वहीं चौधरी न केवल पार्टी की राज्य इकाई के अध्यक्ष पिछले कई सालों से हैं बल्कि महगठबंधन सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं.

दिल्ली में पार्टी नेता इस आशय की खबर से परेशान हैं कि राज्य के 27 विधायकों में से कम से कम 18 नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड के साथ कभी भी जा सकते हैं. पार्टी के दो वरिष्ठ महासचिव गुलाम नबी आजाद और अहमद पटेल ने विधायकों को रोकने की कमान खुद सम्भाल रखी है.

यह भी पढ़ें : बिहार के कांग्रेस विधायकों को लेकर क्यों चिंतित हैं सोनिया गांधी? दो नेताओं को तलब किया

बिहार कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि पार्टी के 27 विधायकों में से अधिकांश का मत है कि राष्ट्रीय स्तर पर लालू यादव के साथ रहना पार्टी की मजबूरी हो सकती है लेकिन विधायक अपने क्षेत्र में कैसे लालू का बचाव करें, आलाकमान यह समझने के लिए तैयार नहीं है. इन विधायकों का मानना है कि लालू का आधारभूत वोट उन्हें मिले या नहीं लेकिन उनके अपने जाति के वोट शायद ही लालू यादव के साथ रहते हुए मिलें. इस बात का पूरा अंदाजा उन्हें अभी से है. इनमें से बगावत पर उतारू अधिकांश विधायक ऊंची जाति से हैं.

यह भी पढ़ें : बिहार में लालू यादव की 'भाजपा भगाओ रैली' को लेकर कांग्रेस में क्यों है असमंजस... 

विद्रोह पर उतारू विधायकों का मानना है कि लालू ने कभी भी गठबंधन में उन्हें सम्मानजनक स्थान न तो विधानसभा चुनाव में और न ही लोकसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे में दिया. साथ ही राज्य कांग्रेस के नेताओं के प्रति उनका व्यवहार भी कभी सम्मानजनक नहीं रहा. वहीं नीतीश कुमार के साथ उनका अनुभव इसके विपरीत रहा. नीतीश ने न केवल लालू यादव के दबाव के बावजूद 2015 के चुनाव में 40 सीटें दीं बल्कि चुनाव प्रचार में भी कोई कसर नहीं रहने दी. साथ ही मंत्रियों के कामकाज में उनकी दखलअंदाजी न के बराबर रही. नीतीश कुमार के नेतृत्व के कारण बीजेपी की शहरों की परम्परागत सीटें कांग्रेस ने जीतीं.

VIDEO : गुजरात में बीजेपी में गए विधायक

कांग्रेस के विधायक जहां बगावत पर उतारू हैं वहीं नीतीश इस मामले में बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व से सलाह लेकर ही कोई कदम उठाएंगे. नीतीश का प्रयास होगा कि उनकी पार्टी के किसी कदम से उनके और बीजेपी के बीच कोई तनाव पैदा न हो.

बीजेपी का गुजरात के लिए मिशन-150 : अमित शाह ने मंत्रियों के साथ बनाई रणनीति

बीजेपी का गुजरात के लिए मिशन-150 : अमित शाह ने मंत्रियों के साथ बनाई रणनीति

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने गुजरात चुनाव को लेकर कई वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों के साथ की बैठक

बीजेपी का गुजरात के लिए मिशन-150 : अमित शाह ने मंत्रियों के साथ बनाई रणनीति
नई दिल्ली: बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने गुजरात में आसन्न विधानसभा चुनाव के संबंध में अरुण जेटली समेत कई वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों के साथ ‘‘रणनीतिक बैठक’’ की जिसमें पार्टी ने ‘‘मिशन 150’’ का लक्ष्य निर्धारित किया.

बीजेपी  के एक पदाधिकारी ने बताया कि बैठक की अध्यक्षता अमित शाह ने की जिसमें वरिष्ठ मंत्री एवं गुजरात के चुनाव प्रभारी अरुण जेटली के अलाव केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, पीपी चौधरी, जितेन्द्र सिंह, निर्मला सीतारमण शामिल थे. बैठक में संगठन मंत्री रामलाल एवं वरिष्ठ नेता भूपेन्द्र सिंह के साथ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू भगानी भी मौजूद थे.

यह भी पढ़ें : अरुण जेटली गुजरात के चुनाव प्रभारी बनाए गए, प्रकाश जावड़ेकर को कर्नाटक का जिम्मा

उल्लेखनीय है कि 182 सदस्यीय गुजरात विधानसभा के चुनाव के लिए बीजेपी ने सत्ता बनाए रखते हुए 150 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है. भूपेन्द्र यादव ने बाद में संवाददाताओं से कहा कि पार्टी की यह रणनीतिक बैठक प्रदेश में चुनावी लक्ष्य को हासिल करने के बारे में चर्चा के लिए बुलाई गई थी.

VIDEO : अरुण जेटली को मिली जिम्मेदारी

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों और पार्टी नेताओं के साथ यह बैठक ऐसे समय में की है जब केंद्रीय मंत्रिमंडल में जल्द फेदबदल किए जाने की अटकलें तेज हैं. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 3 से 5 सितंबर के दौरान ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने जा रहे हैं. ऐसे में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि अगले दो दिनों में मंत्रिमंडल में फेदबदल हो.

Wednesday, 30 August 2017

अन्ना हजारे ने लिखी PM मोदी को 4 पेज की चिट्ठी, बोले- लोकपाल पर फिर करूंगा आंदोलन

अन्ना हजारे ने लिखी PM मोदी को 4 पेज की चिट्ठी, बोले- लोकपाल पर फिर करूंगा आंदोलन

अन्ना हजारे (फाइल फोटो)

समाजसेवी अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेटर लिखकर भ्रष्टाचार और किसानों की समस्‍याओं पर अपनी नाराजगी जाहिर की थी. हालांकि लेटर का जवाब नहीं मिलने पर अब अन्‍ना ने आंदोलन करने का फैसला लिया है.
अन्‍ना ने लेटर में लिखा था कि छह साल बाद भी भ्रष्टाचार को रोकने वाले एक भी कानून पर अमल नहीं हो पाया. लोकपाल, लोकायुक्त की नियुक्ति करने वाले और भ्रष्टाचार को रोकनेवाले सभी सशक्त बिलों पर सरकार सुस्ती दिखा रही है. किसानों की समस्याओं को लेकर स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट पर भी अमल नहीं किया जा रहा है. सरकार के इस रवैए से नाराज अन्ना हजारे ने लेटर में तमाम मसलों के बारे में लिखा था और अब कोई जवाब नहीं मिलने पर दिल्ली में आंदोलन करने का फैसला लिया है.
6 साल हो गए आंदोलन के
अन्ना हजारे  ने भ्रष्टाचार मुक्त भारत को बनाने के लिए 2011 में रामलीला मैदान में आंदोलन किया था. इसके बाद 27 अगस्त 2011 के दिन भारतीय संसद में ‘Sense of the House’ से रिज्युलेशन पास किया गया था. इसमें केंद्र में लोकपाल, हर राज्यों में लोकायुक्त और सिटिजन चार्टर ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर जल्द से जल्द कानून बनाने का निर्णय किया गया था. इसके बाद अन्ना हजारे ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया था. इसे लेकर 6 साल गुजर चुके हैं.
'बीजेपी ने नहीं निभाया अपना वादा'
अन्ना हजारे ने मोदी को लिखे गए लेटर में कहा कि  लोकपाल और लोकायुक्त कानून बनते समय संसद के दोनो सदनों में विपक्ष की भूमिका निभा रही बीजेपी ने भी इस कानून को पुरा समर्थन दिया था. इसके बाद हुए 2014 के लोकसभा चुनाव में आपकी पार्टी सरकार बनी. लोकपाल आंदोलन के बाद देश की जनता ने बड़ी उम्मीद से आपके नेतृत्व में नई सरकार को चुना था. वहीं नई सरकार को मुद्दों पर अमल करने के लिए पर्याप्त समय देना जरुरी था. अन्ना हजारे ने पिछले तीन सालों में कई बार पत्र लिखने का जिक्र भी किया, लेकिन पीएमओ से कोई जवाब नहीं मिला. इतना ही नहीं ना कभी मन की बात में लोकपाल और लोकायुक्त का जिक्र किया गया. उन्होंने लिखा है कि सत्ता में आने से पहले आपने आश्वासन दिया था कि भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाएंगे. हालांकि आप 3 साल से लोकपाल और लोकायुक्त की नियुक्ती नहीं कर सके. सुप्रीम कोर्ट ने भी आपकी सरकार को बार-बार फटकार लगाई है. मोदी ने कहा कि जिन राज्यों में बीजेपी की सरकारें हैं, वहां भी नये कानून के तहत लोकायुक्त नियुक्त नहीं किए गये हैं. इससे ये साफ है कि आप लोकपाल, लोकायुक्त कानून पर अमल करने के लिए इच्छाशक्ति नहीं दिखा रहे हैं.
किसानों की समस्‍या पर भी नहीं दिया जवाब
अन्ना हजारे ने देश में लगातार किसानों की आत्महत्या का भी जिक्र किया है. अन्‍ना के अनुसार, मौजूदा वक्त में खेती पैदावारी में किसानों को लागत पर आधारित दाम मिले इसलिए मैंने कई बार पत्र लिखा था. हालांकि न आपकी तरफ से कोई जवाब आया और न ही स्वामीनाथन कमिटी की रिपोर्ट पर कार्रवाई हुई. इसी वजह से पिछले कई दिनों से महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, तमिलनाडू, आंध्रप्रदेश, तेलंगना, हरियाणा, राजस्थान में किसान आंदोलन कर रहे हैं. साथ ही लेटर में अन्‍ना ने राजनैतिक पार्टियों को सूचना के अधिकार के दायरे में लाने की मांग भी की.

अब आंदोलन
अन्ना हजारे ने पत्र के जरिए कहा कि पिछले 3 साल में आपकी सरकार ने किसी पत्र का जवाब नहीं दिया. इसके लिए अब मैने दिल्ली में आंदोलन करने का निर्णय लिया है. जब तक लेटर में लिखें मुद्दों पर जनहित में सही निर्णय और अमल नहीं होता तब तक मैं आंदोलन दिल्ली में जारी रखुंगा. अन्ना हजारे ने अगले पत्र में आंदोलन की तारीख की घोषणा करने की बात कही है.

गोरखपुर में बच्चों की मौत जारी, योगी बोले- कहीं ऐसा न हो, लोग सरकार के भरोसे छोड़ दें बच्चे

गोरखपुर में बच्चों की मौत जारी, योगी बोले- कहीं ऐसा न हो, लोग सरकार के भरोसे छोड़ दें बच्चे

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ
गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में हो रही बच्चों की मौत के बीच यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हैरान करने वाला बयान दिया है. उन्होंने कहा है, 'मुझे लगता है कहीं ऐसा न हो कि लोग अपने बच्चे 2 साल के होते ही सरकार के भरोसे छोड़ दें, सरकार उनका पालन पोषण करे.'

Tuesday, 29 August 2017

पीएम नरेंद्र मोदी आज उदयपुर के दौरे पर, कई परियोजनाओं का करेंगे उद्घाटन

पीएम नरेंद्र मोदी आज उदयपुर के दौरे पर, कई परियोजनाओं का करेंगे उद्घाटन


पीएम मोदी वहां कई प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और आधारशिला रखेंगे.

पीएम नरेंद्र मोदी आज उदयपुर के दौरे पर, कई परियोजनाओं का करेंगे उद्घाटन

नई दिल्ली / जयपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज उदयपुर के दौरे पर जाएंगे और करीब 15 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली कई परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे और कुछ तैयार परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे. वह वहां एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे. वह प्रताप गौरव केंद्र भी जाएंगे, जहां प्रदर्शनी के माध्यम से महाराणा प्रताप के जीवन और वीरता के बारे में जानकारी दी जाती है. पीएम मोदी वहां कई प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और आधारशिला रखेंगे.

यह भी पढ़ें: पीएम मोदी ने दी अधिकारियों को सलाह, खुद को फाइलों तक ही न रखें सीमित

राजस्थान सरकार के एक प्रवक्ता ने जयपुर में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी पूरी हो चुकीं 11 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे. इस बीच, प्रधानमंत्री की यात्रा से पहले राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे तैयारियों का जायजा लेने और कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उदयपुर पहुंच गई हैं.

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